causes of cerebral palsy in kids – बच्चों में प्रमस्तिष्क अंगघात के कारण

cerebral palsy एक ऐसी समस्या है जिसमे कि शरीर में होने वाली गतिविधि और हावभाव के नियंत्रण को प्रभावित करने वाले अव्यवस्थित समूहो के बारे में उल्लेख किया जाता है। गतिविधि को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के एक या अधिक भाग की क्षति होने के कारण प्रभावित व्यक्ति अपनी मांसपेशियों को सामान्य ढंग से न ही हिला सकता है और न ही उसको सही ढंग से प्रयोग मे ला सकता है इसके लक्षणों (causes of cerebral palsy) का दायरा भी कोई निश्चित नही होता है यह हल्का से लेकर गंभीर तक हो सकता है।

इन दिनों बच्चों में cerebral palsy की समस्या बहुत अधिक मात्रा मे पायी जाती है, लेकिन ये जरूरी नही कि बच्चे ही इस समस्या से ग्रस्त हो, वयस्क भी इस बीमारी से ग्रस्त है ।

शुरुआती cerebral palsy treatment उपचार पर अधिकतर बच्चे कुछ हद तक सही हो सकते है मतलब की पूरी तरह से ठीक होने की सम्भावना कम होती है । लेकिन सेबरल पालिसी बहुत तेजी से बढने वाली समस्या नही है अतः इस ये जरूरी नही कि शरारीक गतिविधियां व हावभाव का अनिंयत्रण होने के कारण और भी कोई दूसरा हो सकता है ।

बहुत से बच्चों, palsy cerebral जैसी समस्याओं से ग्रसित होने के साथ साथ, कुछ दुसरी समस्यायें से भी होती ग्रसित होते है जिनका उपचार होना बेहद ही जरूरी और आवश्यक होता है ।  जैसे कि  – मानसिक सामान्य विकास में कमी; सीखने की अक्षमता; दौरा; और देखने, सुनने और बोलने की समस्या शामिल है।

आपको जानकार ये हैरानी होगी कि अभी तक पूर्ण रुप से cerebral pulsy treatment यानि की सेबरल पालिसी का उपचार नही किया जा सका है लेकिन सेबरल पालिसी के कारण (causes of cerebral palsy) को तीन या तीन साल से ऊपर वाले बच्चों में असानी से पहचाना या देखा जा सकता है । करीबन तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों में 1000 में से 2-3 बच्चों को इस समस्या से ग्रसित पाया गया है । इस देश में हर उम्र के लगभग 500,000 बच्चे एवं वयस्क सेरिब्रल पैल्सि से ग्रस्त हैं।

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सेरिब्रल पैल्सि की तीन मुख्य किस्में :

स्पास्टिक सेरिब्रल पैल्सि (spastic cerebral palsy) –  लगभग 70 से 80 प्रतिशत लोग इस स्पास्टिक सेरिबल पाल्सी से ग्रस्त होते हैं, जिसमें कि मांसपेशियां अतयन्त ही सख्त होती हैं जो कि शरीरिक रूप से होने वाली गतिविधि को प्रायः प्रभावित करने का काम करती हैं। जब दोनों टांगें प्रभावित होने लगती है(स्पास्टिक डिप्लेजिआ), तो बच्चे को चलने में मुश्किलों का सामना करना पडता है क्योंकि कूल्हे एवं टांगों की सख्त मांसपेशियां टांगों को अंदर की ओर मोड़ सकती हैं और घुटने पर क्रास कर सकती हैं इस अवस्था को सिजरिंग के नाम से जाना जाता है । अन्य मामलों में शरीर का केवल एक पक्ष प्रभावित होता है (स्पास्टिक हेमिप्लेजिआ) जैसे कि अक्सर शरीर की बाहें, टांगों के अपेक्षा ज्यादा गहराई से प्रभावित होती हैं। सर्वाधिक गंभीर स्थिती स्पास्टिक क्वाडरिपलेजिआ की होती है, जिसमें कि अक्सर मुंह और जीभ को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों व इनके साथ-साथ शरीर के सभी चारों अंग और धड़ प्रभावित होता है। स्पास्टिक क्वाडरिपलेजिआ वाले बच्चों में मंदबुद्धि और अन्य समस्याएं भी पायी जाती हैं।

डिसकाइनेटिक सेरिब्रल पैल्सि (dyskinetic cerebral palsy) – लगभग 10 से 20 प्रतिशत लोगो में डिसकाइनेटिक सेरिबल पैल्सि के लक्षण पाया जाता है जो कि शरीर के प्रत्येक अंग को प्रभावित करता है। इसके लक्षण मांसपेशी के टोन में उतार-चढ़ावों (बहुत सख्त से लेकर बहुत अधिक ढीले तक बदलता रहता है) का होने जैसी समस्याओं में आसानी से देखा जा सकता है और कई बार यह अनियंत्रित गतिविधि से जुड़ा होता है (जो कि धीमी एवं मुड़ी हुई या त्वरित एवं झटकेदार हो सकती है)।

कायदे से बैठने एवं चलने के लिए अपने शरीर को नियंत्रित करने के लिए बच्चों को अक्सर सीखने में परेशानी होती है। क्योंकि चेहरे एवं जीभ की मांसपेशियां प्रभावित हो सकती हैं, इसके अलावा चूसने, निगलने और बोलने में भी मुश्किल आ सकती है।

एटाक्सिक सेरिब्रल पैल्सि (ataxic cerebral palsy) – लगभग 5 से 10 प्रतिशत लोग इसके एटाक्सिक रूप से ग्रस्त होते हैं, जो कि शरीर में संतुलन एवं समन्वयन स्थिति को प्रभावित करती है। ऐसे समस्या से ग्रसित लोग, अस्थिर चाल के साथ चल सकते हैं और उन्हें उन सामान्य गतियों में संतुलन बनाने में मुश्किल आती है जिनके लिए सटीक समन्वयन की आवश्यकता बहुत ही जरूरू होती है, जैसे कि लेखन करना, रखी हुयी वस्तुओं को उठाना ।

गर्भावस्था के दौरान और जन्म के समय के आसपास ऐसी बहुत सी घटना घटित होती है जिससे कि बच्चे का मानसिक विकास में बाधा आने लगती है, जिसके परिणाम स्वरूप उसकी संतुलन व समन्वयन की स्थिति भी प्रभावित होती है, ऐसी स्थिति को ataxic cerebral palsy के नाम से जाना जाता है । लगभग 70 प्रतिशत मामलों में मस्तिषक को क्षति जन्म से पहले ही पहुचती है, इसके अलावा ये प्रसन के दौरान या बच्चा जब एक महीने का हो रहा हो या वर्ष मे भी घटित होती है ।

कुछ सेबिरल पैल्सि के कारण (causes of cerebral palsy) : –

गर्भावस्था के दौरान संक्रमण का हो जाना (Transition during pregnancy) –  गर्भावस्था के दौरान, रुबेला (जर्मन मीजल्स), साइटोमेगलोवाइरस (एक हल्का वाइरल संक्रमण) और टोक्सोप्लास्मोसिस (एक हल्का परजीवीय संक्रमण) जैस संक्रमण को हो जाना मस्तिष्क में होने वाली क्षति का कारण बन सकते हैं और इनके फलस्वरूप सेरिब्रल पैल्सि की समस्या होना तय होता है।

भ्रूण तक पहुंचने वाली अपर्याप्त आक्सीजन हो सकता है कारण –  भ्रूण तक पहुचने वाली अपर्याप्त आक्सीजन को होना भी इसका कारण हो सकता है, उदाहरण के तौर पर, जब गर्भनाल ठीक ढंग से काम नही करती है या वह प्रसव से पहले गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाती है तो इस बात की पूरी आशंका रहती है कि भ्रूण को पर्याप्त आक्सीजन प्राप्त न हो रही हो।

समय से पूर्व जन्म का होना (premature birth causes)– समय से पूर्व बच्चों का जन्म होना जिनका वजन 3 1/3 पाउंड से कम हो उनको सेबिरल पैल्सि की समस्या, समय से होने वाले बच्चों की तुलना में 30 गुना अधिक होने की सम्भावना हो जाती है ।

प्रसव पीड़ा एवं प्रसव की जटिलताएं का होना अभी हाल फिलहाल तक डाक्टर मान कर चल रहे थे कि मुश्किल प्रसाव के दौरान एसफिक्सिआ (ऑक्सीजन की कमी) सेरिब्रल पैल्सि के अधिकतर मामलों का कारण थी। पर हालिया अध्ययन बताते हैं कि केवल लगभग 10 प्रतिशत मामलों में ही इसकी वजह से सैरिब्रल पैल्सि हुई।

आरएच बीमारी – मां के रक्त और उसके भ्रूण के बीच की यह असंगति का होना, मस्तिष्क को क्षति पहुंचा सकती है, जिसके फलस्वरूप सेरिब्रल पैल्सि हो सकती है।

अन्य जन्मजात कुरूपताएं का होना –  मस्तिष्क की विकृतियों, असंख्य आनुवांशिक बीमारियों, क्रोमोसोमल असामान्यताओं और दूसरी शारीरिक जन्मजात कमियों वाले बच्चों में सेरिब्रल पैल्सि का खतरा और अधिक बढ जाता है।

चोट या किसी और कारण वश हुई सेरिब्रल पैल्सि की समस्या – लगभग 10% प्रतिशत बच्चे जन्म के बाद, किसी चोट या किसी और कारण से सेरिब्रल पैल्सि जैसी समस्याओं से ग्रसित हो सकते है जो कि जीवन के पहले दो वर्षों में बहुत ज्यादा होने की संभावना होती हैं। इस प्रकार की चोटों का आम कारण मस्तिष्क के संक्रमण (जैसे कि मेनिनजाइटिस) और सिर की चोटें होती हैं।

 

सेरिब्रल पैल्सि का समस्या के निदान के लियें मुख्य रूप से इस बात को मूल्यांकन किया जाता है कि कोई शिशु या बच्चा कि गति कैसी है, किस प्रकार से वो चलता है या बैठता है ।  सीपी वाले कुछ बच्चों की बात करे तो उनमें मांसपेशी ढीली होती हैं, जिससे कि वे लटके हुए नजर आ सकते हैं। अन्य बच्चों के पास ज्यादा सख्त मांसपेशी भी हो सकती है जो कि उन्हें सख्त नजर आने वाला या मांसपेशी के परिवर्तनीय स्वास्थ्य वाला (एक समय में बढ़ा हुआ और अन्य समय में कम) बना देती है। इसके अलावा ये भी हो सकता है कि डॉक्टर मैग्नेटिक रिसोनैंस इमेजिंग (एमआरआई), कंप्यूटेड टोमोग्रैफि (सीटी स्कैन) या अल्ट्रासाउंड जैसे ब्रेन-इमेजिंग परीक्षणों कराने को बोले जिससे कि सेरिब्रल पैल्सि के कारण की पहचान करने में सहायता हो सके, कई बार ऐसे परीक्षण हुये है जिससे की सेरिब्रल पैल्सि के उपचार में सहायता प्राप्त हुयी है ।

सेरिब्रल पैल्सि का उपचार के तरीके – (palsy cerebral treatment procedure) –

सेरिब्रल पैल्सि का उपचार के लियें स्वास्थय से सम्बन्धित अनुभवी डाक्टरों की टीम काम करती है जो कि बच्चे एवं परिवार के साथ बच्चे की जरूरतों की चीजों को पहचान करने के लिए काम करती है। इस टीम में बालरोग विशेषज्ञ, भौतिक मेडिसिन और पुनर्वास चिकित्सक, आर्थोपीडिक सर्जन्स, फिजिकल एवं अक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, नेत्ररोग विशेषज्ञ, वक्तृत्व/भाषा पैथोलॉजिस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता एवं मनोवैज्ञानिक आदि लोग शामिल हो सकते हैं।

बच्चे की निदान के शीघ्र बाद ही उसकी चिकित्सा (cerebral palsy diagnosis) शुरू होती है। इससे प्रेरक पेशी कौशलों (जैसे कि बैठना एवं चलना) में वृद्धि होती रहती है इसके साथ साथ मांसपेशी की ताकत बेहतर बनी होती है और कांट्रैक्चर्स (जोड़ की गतिविधि को सीमित करने वाली मांसपेशियों का छोटा होना) को रोकने में अतयधिक सहायता मिलती है। कई बार कांट्रैक्चर्स को रोकने में सहायता करने और हाथों एवं टांगों के प्रकार्य को बेहतर बनाने के लिए उपचार के साथ-साथ ब्रेसेस, स्पिंलंट्स या कास्ट्स को प्रयोग में लाया जाता है

दवाओं का प्रयोग स्पास्टिसिटी के प्रभाव को कम करने या असमान्य गतिविधि को रोकने के लियें किया जा सकता है। लेकिन दवाओं का प्रयोग एक स्तर तक ही सीमित रहता है, मौखिक औषधि उपचार अक्सर बहुत सहायक नहीं होता। कई बार सीधे स्पास्टिक मांसपेशियों में दवाओं का इंजेक्शन अधिक मददगार होता है, और इसका असर कई महीनों तक बना रह सकता है।

शोधकर्तोओं के अनुसार ये पता चला है कि सेरिब्रल पैल्सि की उत्पत्ति गर्भावस्था के दौरान शुरू में गलत कोशिका के विकास की वजन से होती है। उदाहरण के लिए, शोधकर्तोओं के एक समूह ने हाल ही में पाया कि सेरिब्रल पैल्सि वाले एक तिहाई से अधिक बच्चों में कुछ दांतों पर दंतवल्क गायब पाया गया (एनामेल) था। वैज्ञानिक इसके अलावा अन्य घटनाओं, जैसे कि मस्तिष्क में होने वाले रक्त स्राव, दौरों और सांस तथा संचरण की समस्याओं, का के अध्ययन में लगातार प्रयास कर रहे हैं जोकि नवजात बच्चे के मस्तिष्क को खतरे में डालती हैं।

स्रोत : यूनाइटेड सेरिब्रल पैल्सि, मार्च आफ डाइम्स, नेशनल इंस्टीट़़्यूट आफ न्यूरोलॉजिकल डिस्आर्डर्स एंड स्ट्रोक।