भारत में 82% लोग तनाव की चपेट में – Depression Problem in Man

भारत में तनाव से जूझने वाले लोगो की संख्या के इजाफा हो रहा है और यह न केवल देश तक ही सीमित है बल्कि अब बडें बडें महानगर भी इसकी चापॆट में आ चुके है, तनाव के कारणों की बात की जाए तो लोगों का काम और उनकी आर्थिक स्थिति इसकी सबसे बड़ी वजह है ।

हर शहर में हर शख्स परेशान सा है एक हालिया सर्वे की माने तो भारत देश में ही 89% लोग तनाव से ग्रसित है, हर 8 लोगों में से एक या दो लोग इस बीमारी से इल कदर जूझ रहे है कि उनका इस समस्या से निकल पाना लगभग नामुकिन सा हो चुका है ।

हाल ही किये गये सर्वे के मुताबिक, भारत ही नही, अमेरिका, बिट्रेन, जर्मनी, फ्रांस, चीन, ब्रजील और इंड़ोनेशिया जैसे 23 देशों भी इस बडी समस्या से दो चार हो रहे हैं ।

इसका मुख्य कारण लोगो का काम और उनकी आर्थिक स्थिति है, आज कल के समय में competition का दौर बहुत ज्यादा है, लोग बढ रहे हैं लेकिन काम जस का तस उसकी स्थिति में आगे चल रहे है । लोग मेहनत करते है लेकिन इतना नही कमा पाते कि अपने सभी प्रकार के खर्चों का निर्वाहन कर सकें । जिससे की वो अपने future के बारे में सोचने में मजबूर हो जाते है और ज्यादा सोचने वाला व्यक्ति  Depression  का शिकार हो जाता है ।

Depression एक ऐसी समस्या है जिससे निजात पाना या इससे दूर रहना लगभग ळगभग नामुकिन हो जाता है, इसके लियें Depression ग्रस्त लोगों को सबसे पहले खुद को अन्दर से मजबूत बनाना होगा और फिर positive thinking के साथ आगे बढना होगा ।

सर्वे में पता चला है कि भारत में 80% लोगो से बात करने पे उन्होने ये बताया कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण हम लोग Depression का इलाज कराने में सक्षम नही है, क्यों कि हम लोग की स्थिति इतनी अच्छी नही कि इसके के महिने का इलाज करा सकें, इसीलियें हम तनाव के शिकार हो जाते है ।

तनाव के कारण – अगर हम तनाव के कारणों की बाते करे तों लोगों का काम और उनकी आर्थिक स्थिति इसकी सबसे बडी वजह है, हांलाकि लोगों से बाते करने में पाता चला कि जहां उनका कार्यस्थल उनके अनुसार अनुकुल न होने के कारण तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है लेकिन कुछ लोगों का ये भी कहना है कि साथ में काम करने वाले सहकर्मियों के सहयोग से असानी से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है ।

तनाव के कुछ मुख्य कारण निम्नवत है –

  1. आफिस मे अनुकुल वातावरण न होने की वजह से तनाव ग्रस्त रहना
  2. आफिस में काम के दबाव में होने से तनाव ग्रस्त रहना
  3. Future के लिये सोचकर, मनचाहा result न मिलना तनाव ग्रस्त होने की वजह
  4. शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा परिणाम न मिल पाने के कारण तनाव ग्रस्त रहना
  5. छोटी छोटी बातों को बहुत बडी बनाकर उसके बारें में सोचना
  6. आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण भी तनाव ग्रस्त रहना

सर्वे के निष्कर्ष से यह तथ्य सामने आया कि भारत में हर दो में से एक व्यक्ति वृद्धावस्था में अपनी बचत से अपने स्वास्थ्य संबंधी खर्च पूरे करता है और उसके बाद बीमे का नंबर आता है. भारत में हर दस में से चार लोग अपने लिए स्वास्थ्य बीमा लेते हैं. यहां यह उल्लेखनीय है कि वृद्धावस्था की ओर बढ़ रहे लोग इस मामले में बेहतर तैयारी करते हैं और नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ ही बीमा भी कराते हैं. लोगों के तनावग्रस्त होने के कारणों में मोटापा और बीमारी भी शामिल है और इस क्रम में नींद संबंधी परिवर्तनों का स्थान सबसे नीचे रहा ।

आजकल की रोजमर्रा जिंदगी में इतनी भाग दौडं हो चुकी है कि किसी भी क्यक्ति के जीवन एक बार तनाव मतलब कि depression in man आना है सामान्य सी बात हो गयी है, लोग किसी न किसी बात से परेशान होते है जिसकी वजह से वह पूर्ण रुप से depression ग्रसित हो जाते है । कुछ लोग इसको थोडा lightly लेकर, dealing with depression का तरीका को बहुत अच्छी तरीके से deal  करकें आगे बढते है और कुछ लोग इसको अपनी जिंदगी का हिस्सा मान लेते है और इस बीमारी में धीरे-धीरे इतना घुसते चाले जाते है कि जिंदगी में मयूस होकर ये मान लेते है कि अब जिंदगी में कुछ अच्छा नही होने वाला है ।

चिंता और तनाव के कारण शरीर में कई हार्मोन(hormones) का level  बढ़ता जाता है,  जिनमें एड्रीनलीन (adrenaline) और कार्टिसोल (cortisol) प्रमुख हैं। लगातार तनाव(stress) और चिंता(tension) की स्थिति अवसाद यानि की depression में बदल जाती है।

signs and symptoms of depression – तनाव ग्रस्त होने के लक्षण और उनके तरीके –

depression ke karan बहुत से होते है लेकिन जो मुख्य कारण है वो निम्नवत है –

मनोविज्ञानिक लक्षण – PSYCHOLOGICAL SYMPTOMS)
1 निरन्तर चिंता करना
2 स्वस्थ के विषय में चिंता करना
3 नकारात्मक विचार आना
4 भ्रामक विचार
5 काम में मन ना लगना
6 स्वभाव चिड़चिड़ा होना
7 छोटो छोटी बातो पर गुस्सा आना
8 भ्रम करना
9 मनःस्थिति में बदलाव
10 पागलो जैसा बर्ताव करना
11 अकेला रहना
12 बुरे सपने आना
13 खुश न रहना
14 स्ट्रेस लेना
15 कम बोलना
16 डर लगना

शारीरिक लक्षण – PHYSICAL SYMPTOMS
1 सर दर्द होना
2 दिल का काँपना
3 खाना निगलने में मुश्किल
4 उल्टी आने को होना
5 बार बार बाथरूम जाना
6 पीला पड़ना
7 श्वास छोटा होना
8 चक्कर आना
9 मासपेशियों में दर्द
10 दिल की धड़कन तेज होना
11 शारीर का काँपना
12 पसीना आना
13 ब्लड प्रेशर कम ज्यादा होना
14थकावट होना

डिप्रेशन के दौरान हमारे शरीर में होने वाले changes –
हम किसी भी परिस्थिति में कैसी प्रतिक्रिया करते हैं यह भी डिप्रेशन का एक प्रकार होता है। किसी भी चुनौती में हमारा response physiological होता है लेकिन इसका हमारी physical health पर भी असर होता है। जब हम कोई challenge face करते हैं तो हमारा शरीर हमारे शरीर की रक्षा के लिए संसाधनों को सक्रिय करता है, जिससे हमें उस परिस्थिति से लड़ने की शक्ति मिलती है।
जब हमें तनाव होता है तो हमारा शरीर cortisol, adrenaline और noradrenaline नामक chemicals को काफी ज्यादा मात्रा में produce करता है। यह chemicals हमारा heart rate बढ़ा देते हैं, हमारी muscles को लड़ने के लिए prepare करते हैं, हमारा दिमाग अचानक ही काफी alert हो जाता है और हमें पसीना आने लगता है। यह सब तनाव की challenging situation में हमारा शरीर हमारी रक्षा के लिए करता है।

तनाव से बचने के लियें उपाय –